पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति तुक-कोश

८. ५. २०१८

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कुण्डलिया हाइकु अभिव्यक्ति हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर नवगीत की पाठशाला रचनाकारों से

उतनी गर्मी नहीं धूप में

 

 

उतनी गरमी नहीं धूप में
जितनी गरम मलाई है
हरे चमकते विटपों ने ही
यह पंक्ति लिखवाई है
1
ढूँढें चलो कहाँ है पछवा
कहाँ छुपी है पुरवाई
मन का आदिम उत्सव थामे
थाहें मानस- गहराई
प्रश्नों का उत्तर देने को
आतुर रामसलाई है
1
कल-छल करते कूलों से
फिर कोई अद्भुत राग सुनें
चिड़ियों की चहचह में अपने
अब का कल का भाग सुनें
चूल्हे से पूछें क्यों उसने
रोटी नहीं पकाई है
1
मौसम सम्मानित होता है
जब जब उसको जीते हैं
ओठों में बस बस जाए
ऐसा ही अमृत पीते हैं
बाक़ी जीवन तो थकान की
टूटी हुई जम्हाई है
1
- अश्विनी कुमार विष्णु

इस माह
ग्रीष्म महोत्सव के
अवसर पर

गीतों में-

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अनूप अशेष

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अश्विनी कुमार विष्णु

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आभा सक्सेना दूनवी

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कल्पना मनोरमा

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कल्पना रामानी

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कुमार रवीन्द्र

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कृष्ण भारतीय

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गरिमा सक्सेना

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चन्द्रप्रकाश पाण्डे

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देवव्रत जोशी

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देवेन्द्र सफल

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प्रदीप शुक्ल

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बसंत कुमार शर्मा

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ब्रजनाथ श्रीवास्तव

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भावना तिवारी

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मधु शुक्ला

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मलखान सिंह सिसौदिया

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मानोशी चैटर्जी

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योगेन्द्र प्रताप मौर्य

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रंजना गुप्ता

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रविशंकर मिश्र रवि

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राकेश सुमन

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राजेन्द्र वर्मा

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राहुल शिवाय

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विनोद निगम

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शशिकांत गीते

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शशि पुरवार

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शिवानंद सिंह सहयोगी

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शीलेन्द्र सिंह चौहान

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सीमा अग्रवाल

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सुरेन्द्र कुमार शर्मा

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सुरेन्द्रपाल वैद्य

छंदमुक्त में-

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अजित कुमार

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अश्विन गांधी

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मधु संधु

छंदों में -

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ओमप्रकाश नौटियाल

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परमजीतकौर रीत

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

सहयोग :
कल्पना रामानी