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नये साल का
पहला दिन |
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आया नया-नवेला दिन है!
नये साल का पहला
दिन है!
सूरज निकल पड़ा है घर से
लेकर अपनी नवल रश्मियाँ
और भोर के हाथों में है
गर्म चाय से भरी प्यालियाँ
नर्म मखमली हरित दूब पर
बिछी ओस से बहला
दिन है!
मचल रही है तितली जैसी
शॉल ओढ़कर धूप गुनगुनी
ठिठुर रही है हवा ठंड में
करती सबकी बात अनसुनी
काट तमस को आया फिर से
इक प्यारा सा उजला
दिन है!
बजे घंटिया मंगल धुन हों
और द्वार पर एक अल्पना
कल की बातें रखें ताक पर
हो आगत की सुखद कल्पना
किसी रुपहले पर्दे पर ज्यों
उतरा नया सुनहला
दिन है!
- श्रीधर आचार्य 'शील' |
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इस माह
(नववर्ष के
अवसर पर)
गीतों में-
अंजुमन में-
छंदमुक्त में-
छंदों में-
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