अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

      नये वर्ष की ओर

 

हो गत विगत नवागत आगत
हे नव वर्ष तुम्हारा
स्वागत

पिछली भूलों से सीखें हम
कुछ तो मानव से दीखें हम
भाव प्रेम हर ह्रदय उदय हो
कुछ ऐसा कर दो
नव आगत

भारत भू फिर विश्व गुरु हो
निज स्वरूप पहचान शुरू हो
हम हैं राम -कृष्ण के वंशज
हम में अब भी
अंश तथागत

कसे मूल्य का ताना -बाना
नैतिकता की चादर लाना
ढकें नग्न अभिलाषाओं को
प्राप्त करें प्रेम
शरणागत

- निशेष जार
१ जनवरी २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter