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      नव-वर्ष आया है

 
नव-वर्ष आया है—पर क्या बदला है?
घड़ी की सूइयाँ घूमती हैं
कैलेंडर के पन्ने पलटते हैं
और हम वहीं के वहीं रहते हैं
क्या नव-वर्ष की गुनगुनी धूप पुरानी यादों को
सोख सकेगी?
क्या बीते वर्ष में की गईं भूलें
हमारे मन के स्याह पन्नों से
मिट पाएँगी?

शाय़द नहीं...
नव-वर्ष सिर्फ़ एक संख्या नहीं, वो चेतना है
हर साँस में सुधार की, हर कदम में परिवर्तन की
आओ, इस वर्ष हम स्वयं से वायदा करें
ना केवल शब्दों में, ना केवल जश्न में
बल्कि सोच में, कार्य-कलापों में
आओ, इस नव-वर्ष में
अहंकार को दूर भगाएँ
सहानुभूति बढ़ाएँ
सत्य को अपनाएँ
और नफ़रत की दीवारें गिराएँ

समय का पहिया चलता रहेगा,
आत्मसम्मान बचा रहेगा
हमारे जीवन को नवीन आकार देगा
तभी तो नव वर्ष हम सभी के लिये
मंगलमय होगा

- निरुपमा सिंह
१ जनवरी २०२६

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