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        नये वर्ष में

 
नये वर्ष में नवभारत से, सबको ऐसी आस
सदाचार के साथ बढ़ेगा, आपस में विश्वास
आज समय को बना साक्षी, उठे एक आवाज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

उड़ना चाहें अति उत्साही, नभ में बिना प्रयास
ख़ाली ख़्वाब सजा लेने से, संभव नहीं विकास
मर्म कर्म का समझ करें हम, जग में ऐसे काज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

तोड़ गुलामी की जंजीरें, हैं तो सब आज़ाद
किन्तु स्वार्थ-पिपासा ने, सब तंत्र किये बरबाद
देश प्रगति व जनसेवा ही, माँग समय की आज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

आज युवाओं के तन मन में, ख़ालीपन का रोग
करना होगा नई सदी में, इनका भी उपयोग
स्वीकारें, सब युवा चुनौती, आगे बढ़े समाज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

विद्युत के नित उपयोगों से, जग में सबके ठाठ
याद रहा न आज किसी को, मितव्ययता का पाठ
सदुपयोग हो उद्योगों में, उपजे अधिक अनाज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

पर्यावरण है जटिल समस्या, आज हमारे द्वार
अब निश्चित ही करना होगा, इसका भी उपचार
वन्य जीव, वन संरक्षण से, करें सभी आगाज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

दम्भ-द्वेष के तम में डूबी, नैतिकता की बात
धन-दौलत के मोह ने लूटी, रिश्तों की सौगात
आज हटाना होगा जग से, दुष्कर्मों का राज
नये वर्ष में, सभी बदल दें
जीने का अंदाज

- आचार्य विजय तिवारी 'किसलय'
१ जनवरी २०२६

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