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नये साल में |
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नये साल में गीत लिखें कुछ
नये भाव के ऐसे
हर शाखा पर पत्र-पुष्प नव
ऋतु बसंत में जैसे
ख़ुशियाँ हों हर घर आँगन में प्रेम प्यार हो मन में
श्रद्धा भाव रहे पूजा में धैर्य, ध्यान-चिंतन में
सोचें, दुखियों के दुख हम कब
मिल-बाँटेंगे, कैसे?
धर्म एक हो मानवता का फूले फले निरन्तर
जाति-धर्म, नस्लों, रंगों का रहे न कोई अंतर
कब तक मूक सहेंगे भेदभाव
का तांडव ऐसे
युवा बनें सुशिक्षित मानव त्यागें भय-आडम्बर
रखें नियंत्रण खुद अपना अपनी धरती, अम्बर पर
चढ़ें न मन पर रंग कभी इस
जग के ऐसे वैसे
-विनीता तिवारी
१ जनवरी २०२६ |
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