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       करें नववर्ष का स्वागत

 
करें नव वर्ष का स्वागत तहेदिल से सभी मिलके
ये सृष्टि हंस रही है आज अभिनंदन
में खिलखिल के

सजी है भोर सिंदूरी अवनि से दूर अंबर तक
पहन कर किरण पैजनियाँ उतरती आज हो रुनझुन
झुकी हैं बाग में डाली भरी गदराई कलियों से
झरें मकरंद, भौरों की सुखद आमद करे गुनगुन
फलेंगे और फूलेंगे कुसुम
बन भाव हर दिल के

हवा में तैरते पंछी खेत में झूमती फसलें
कि हर घर में नई सौगात ये नव वर्ष लाया है
उड़ें क्रिसमस में गुब्बारे पतंगें देख इतराएँ
मगन हो आसमाँ ने झूम मधुमय गीत गाया है
सितारों की मधुर रुनझुन
चाँदनी दे गई चल के

वो हरसिंगार मेरे द्वार खिलकर हँस रहा ऐसे
कि झरने की मधुर सरगम कहीं नव गीत गाती है
सजी ड्योढ़ी पे रंगोली औ बंदनवार पल्लव के
प्रकृति दुल्हन के जैसे शर्म से घूँघट उठाती है
है नव उल्लास का मौसम
ख़ुशी के भाव हैं खिलके

- जिज्ञासा सिंह
१ जनवरी २०२६

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