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      मुबारक नववर्ष है

 
मुबारक नववर्ष है
घोचूपने का जाल

दोस्ती भी जैसे फिलिस्तीन, इज़राइल
बधाई में भौंक रहे देखो स्टाइल
खुद की तारीफ में
बजा रहे गाल

शातिर दिमाग से दिल के फासिस्ट
जीभ लपलपाती तमन्ना की लिस्ट
लो, घी से तरबतर
लड्डू का थाल

होटल है पंचतारा सुर है न ताल
बहस है गरीबों का कठिन नया साल
प्याले में चाय के
भयंकर भूचाल

महँगाई ऐसी ज्यों चिपक गई जोंक
खाने को मिलती है दाल बिना छौंक
खस्ता दिल! क्या कहूँ
मुबारक हो साल

- हरिहर झा
१ जनवरी २०२६

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