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      नये वर्ष का गीत

 

किरण किन्नरी कंठ गा उठा
नए वर्ष का गीत

सृजित ऋचाएँ
हुई कर्म की सूक्त साहसी स्वर के
आगे आगे चले भागीरथ श्रम ज़ान्हबी लहर के
हर्ष वैद्य स्पर्श प्राप्त कर
रोग शोक भयभीत

किरण किन्नरी गीत गाउठा
नए वर्ष का गीत

मूल मंत्र
उच्चरित दिशाएँ करती उपनिषदों के
स्वप्न सत्य की भू पर आने को है वेदविदों के
वसुधा एक कुटुंब हिलोरें लेती
अंतस प्रीत

किरण किन्नरी गीत गाउठा
नए वर्ष का गीत

- पं गिरिमोहन गुरु
१ जनवरी २०२६

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