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      झूम रहा है साल

 
बीत गया दिसंबर
आया नया कलेंडर
सब कह रहे आया है साल नया
झूमेंगे लोग मनाएंगे जश्न नये साल का
रौशनी की चौंध में डूब जायेंगे लोग

लेकिन मंगलू और बुधिया ?
उनकी सूनी आँखों में
तो ठहरे रहेंगे उनके उजड़े खेत
बे मौसम की बरखा ने किस तरह कर दिया
सब मटिया मेट
गल गयी पालक, मेथी और लाल भाजी
मर गया टमाटर और धान का करपा
वह भी तो भीगकर पकला गया खेत में

इन्हीं फसलों का हाथ थाम
आया करता था उनका नया साल
लेकिन इस बार.. उनकी आँखों में ठहर
गया है बीता समय
इस बरस नहीं आएगा
उनका नया साल

- उर्मिला शुक्ल
१ जनवरी २०२६

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