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      सुंदर यह नव वर्ष हो

 
प्रेम-नेह की वृष्टि हो, हृदय-कुंज मकरंद
सुंदर यह नव-वर्ष हो
चहुँदिसि हो आनंद

नहीं कहीं आतंक हो ,न हो किसी से बैर
जब जीवन यह है सफ़र, करें सभी बस सैर
हिंसा-हत्या-आक्रमण
सब हो जाएं बंद

प्रगति और उत्थान हो,बढ़े सदा धन-कोष
क्रोध-जलन का अंत हो, नहीं रहे उर-रोष
मित्र सभी हों अब यहाँ
बहे हवा शुचि मंद

लड़े न कोई देश अब, रहे सभी में नेह
हर पग ही हो शांति-पथ, राम-राज्य हर गेह
अनहोनी घटना न हो
करूँ विनय लिख छंद

खुलकर प्राणी जी सकें, सबको हो विश्वास
गोला संग बारूद का, नहीं जीव हो दास
सदा सकारात्मक रहें
इच्छा रहे बुलंद

- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'
१ जनवरी २०२६

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