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     नये साल से कहा दिसंबर ने

 
नए साल से कहा दिसम्बर ने जाने से पहले
बोला, लंबित है वह छोड़ा है जाने से पहले

वह ही छोड़ा है मैंने निर्णीत न हो पाये जो,
बिना बताए जाना मुश्किल है जाने से पहले

लंबित करने की परंपरा, इसीलिए डाली है
कुछ कल के भी लिए छोड़ना है जाने से पहले

न्याय प्रशासन सभी महकमे, निष्ठा से हैं करते
लंबित कई फ़ाइलें वादे, घर जाने से पहले

नेताओं की बात कहें क्या, भरमाने की आदत
आश्वासन लालच दे जाते हैं जाने से पहले

ऐसा नहीं देश ने तोड़े, कीर्तिमान कितने ही
उनकी सूची दे जाऊँगा, मैं जाने से पहले

यही चलन था यही रहेगा, बोझ न लेना सिर पर
तुझे यही कहना था मितराँ, दे जाने से पहले

याद करेगा तुझको यह जग, कर पाया जो कुछ तू
कोशिश तो मैंने भी की थी, यह जाने से पहले

बने राष्ट्रभाषा हिंदी है, यही तमन्ना ‘आकुल’,
राष्ट्र रहेगा ऋणी प्रार्थना, है जाने से पहले

-आकुल
१ जनवरी २०२६

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