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शुभकामना
(नव वर्ष के अवस पर चोका में)

 
सुमन बन
खिले रंग प्रत्यंग
प्रसारित हो
सुन्दर मकरंद
सुगन्धित हो
नभ तक निर्बन्ध
अचर -चर
सभी रहें सानन्द
पवन अब
गाये कोमल राग
हँसे नभ भी
पाकर अनुराग
जगे जग में
शुभ निश्छलभाव
सभी उर में
उमंग शुभ भाव
अवनि पर
गूँजे मंगल गान
एक लय में
मधुरिम हो तान
सर्जना में हो
दिव्यानन्द रचा दे
सात्विकता के छन्द!

- मिथिलेश दीक्षित
१ जनवरी २०२६

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