अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में शैलेन्द्र चौहान की
रचनाएँ -

नई रचनाएँ-
अच्छा कवि
आतप
छवि खो गई जो
समभाव हुए हैं

छंदमुक्त में-
अग्निगर्भा हूँ मै
आदिवासी
आषाढ़ बीतने पर

एक घटना
एक वृत्तचित्र: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व-संध्या पर
क्या हम नहीं कर सकते कुछ भी
कबीर बड़
काँपते हुए
कोंडबा
चिड़िया और कवि
जघन्यतम
जय-जयकार
जीवन संगिनी

तबादला
थार का जीवट
पतंग आकाश में
प्रणय रत
फफूँद
भद्रावती
महाकाल
मूर्ख
लैंडस्केप
लोअर परेल
शब्द नहीं झरते
सम्मोहन
स्त्री प्रश्न
स्वप्न विशद ऊर्जा का
सुबह के भूले

हम शत्रु नहीं होना चाहते थे

संकलन में
गुच्छे भर अमलतास-मरुधरा
                -आतप
                -विरक्ति

 

समभाव हुए हैं

भाव बहुत बेभाव हुए हैं
दिन तो दिन रातों के भी अभाव हुए हैं
कितने अँधियारे कष्टों में काटे
उजियारे कितने अलगाव हुए हैं
अपने अपने किस्से हर कोई जीता है
औरों के किस्से किससे समभाव हुए हैं
दूर निकल आए जब तक भ्रम टूटे
वक्त बहुत बीता बेहद ठहराव जिए हैं
नहीं कहूँगा दुख मैं इसको
सुख ने भी कितने घाव दिए हैं
भाव बहुत बेभाव हुए है

१ फरवरी २०२४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter