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कविताओं में-

आषाढ़ बीतने पर
एक घटना
एक वृत्तचित्र: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व-संध्या पर
क्या हम नहीं कर सकते कुछ भी
कबीर बड़
काँपते हुए
कोंडबा
चिड़िया और कवि
जघन्यतम
जीवन संगिनी

तबादला
थार का जीवट
पतंग आकाश में
भद्रावती
मूर्ख
लैंडस्केप
लोअर परेल
शब्द नहीं झरते
स्त्री प्रश्न
सुबह के भूले

संकलन में
गुच्छे भर अमलतास-मरुधरा
                -आतप
                -विरक्ति

  प्रणय रत

मांडव के महलों जैसे
क्षत
ये कल्प वृक्ष

कब
कहाँ
कौन रहा होगा

वर्जिश
मालिश
रूमान

उकाबों के पंख झड़ते
प्रेम के अनन्य
अबूझ प्रतीकों से

अवर्णनीय रूप
रूपमती का
कहाँ-कहाँ से
प्रत्यावर्तित हो
झाँकता
कितने आइनों में

जहाज महल
उजाली बावड़ी
छप्पन महल
बाज बहादुर के
महलों से
चमकता

सहलाता
हजारों दर्शकों के
तृषित मन


२८ जून २०१०

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