अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में शैलेन्द्र चौहान की
रचनाएँ -

नई कविताएँ-
कबीर बड़
काँपते हुए
जघन्यतम
लोअर परेल

कविताओं में-
आषाढ़ बीतने पर
एक घटना
एक वृत्तचित्र: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व-संध्या पर
क्या हम नहीं कर सकते कुछ भी
कोंडबा
चिड़िया और कवि
जीवन संगिनी

तबादला
थार का जीवट
पतंग आकाश में
भद्रावती
मूर्ख
लैंडस्केप
शब्द नहीं झरते
स्त्री प्रश्न
सुबह के भूले

संकलन में
गुच्छे भर अमलतास-मरुधरा
                -आतप
                -विरक्ति

  सुबह के भूले

क्या लौटना होगा
उस द्वीप पर
जहाँ से नौका चली थी
भूल कर तल्खियाँ
मटमैला धूसर आसमान

रास्ते कंटीले
पथ अपरिचित
मंज़िल भटकी हुई

चूक रही अब उम्मीदें
अपना उत्स पाने की
उम्र का प्रौढ़ होना
वहन करना बोझिल कर्तव्य

ऐसे में लौटना ही पड़े
गंदगी से पटे
सुविधा-रहित द्वीप पर
तब भी
बहुत घाटे का नहीं
यह करार

अच्छा है ताउम्र भटकने से
लौटना अपने ही शहर

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter