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स्त्री प्रश्न
सुबह के भूले

संकलन में
गुच्छे भर अमलतास-मरुधरा
                -आतप
                -विरक्ति

  क्या हम नहीं कर सकते कुछ भी

कभी गावस्कर
कभी पी. टी. उषा
बनना चाहती
मेरी बिटिया

खेलों के प्रति उसका आकर्षण
निश्चित है धनात्मक
प्रसारित होता जब टी. वी. पर
खेलों का आँखों देखा हाल
दिन भर बैठी रहती
टी. वी. के आगे

स्कूल की टीचरों से प्रभावित
बन जाती टीचर खेल-खेल में
ब्लैक बोर्ड पर लिखती प्रश्न
और पूछती उत्तर

नकल उतारती
खेलती बहन के साथ
डॉक्टर या इंजीनियर बनने की
इच्छा भी जगी है उसकी
कुछ बनने की इच्छा
निश्चित ही है अच्छी

इधर कुछ दिनों से
कर दिया है बंद उसने
करना महत्वाकांक्षी बातें

रोज
मृत्यु और नरसंहार की
सुनते-सुनते ख़बरें
सहम गई हैं वह

पूछती है अब
क्यों मरते हैं इतने लोग
कौन होते हैं मारने वाले
कहाँ से आती है इतनी
गोली-बारूद?

क्या करती है पुलिस, सेना
क्या करते हैं ये मंत्री
और
हम नहीं कर सकते क्या
कुछ भी?

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