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एक वृत्तचित्र: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व-संध्या पर
क्या हम नहीं कर सकते कुछ भी
कबीर बड़
काँपते हुए
कोंडबा
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जघन्यतम
जीवन संगिनी

तबादला
थार का जीवट
पतंग आकाश में
भद्रावती
मूर्ख
लैंडस्केप
लोअर परेल
शब्द नहीं झरते
स्त्री प्रश्न
सुबह के भूले

संकलन में
गुच्छे भर अमलतास-मरुधरा
                -आतप
                -विरक्ति

  आदिवासी

स्नायुतंत्र में
प्रविष्ट हो चुकी
शोधित वायु

मस्तिष्क, धमनियाँ
शिराएँ, कोशिकाएँ
सचेत

चौतरफा चिल्ल-पों
जर्जर होते ही शरीर
फूल गया
गुब्बारे सा
हीलियम नहीं

भरी
कार्बन डाइ ऑक्साइड

तड़कता हाड़-माँस
भयानक पीड़ा मन में
अच्छी सेहत को
दरकार संसाधन,

औषधि
अति महंगी

कपूर और लौंग बाँध
हाथों में
दूर भगाते
चिकनगुन्या,
मलेरिया, डेंगू

विपन्न भील
मालवा, निमाड़ के


२८ जून २०१०

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