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अनुभूति में अश्विन गांधी की कविताएँ-

नई रचनाओं में-
कारवाँ
खुशी और दर्द
सूरज ढलता है

छंदमुक्त में-
अपनी खुशी के लिये
अनुभूति एक साल की
ओ अनुभूति! जनमदिन मुबारक तुझे
कोई आता नहीं
बुढ़ापा
मध्य समंदर
मुझे कुछ कहना है
अनुभूति तुम्हारी हो या हमारी
मेरा दोस्त मेरा आसमाँ

संकलन में-
वसंती हवा – गीत वसंत के
धूप के पांव – गरमी
गांव में अलाव – आज सुबह
गुच्छे भर अमलतास–सोचता हूँ
पिता की तस्वीर– शिवास्ते पंथानः सन्तु
ज्योति पर्व– एक दिया जले
         – कोटि कोटि दीप जलें
नया साल– नया साल आने को है
ममतामयी– माँ प्यारी माँ

क्षणिकाओं में-
पतंग
आँखों से

 

मध्य समंदर में

देशी विदेश में
विदेशी देश में
आधा पूरब
आधा पश्चिम

मध्य समंदर में . . .

छोड़ा एक किनारा
आया दूसरे किनारे
बीत गये बरस
फिर भी रहा
मध्य समंदर में . . . .

अच्छाई पूरब की
अच्छाई पश्चिम की
मिला के हाथ
मिला के दिल
जूस्तजू रही
एक टापू बनाने की
मध्य समंदर में . . .

 

 

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