अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में अजंता शर्मा की रचनाएँ

नई कविताएँ-
आओ जन्मदिन मनाएँ

ढूँढती हूँ
मेरी दुनिया

कविताओं में-
तीन हाइकू
जाने कौन-सी सीता रोई
ज़िंदगी
दूरियाँ
अनुरोध
अस्तित्व
उत्प्रेरक
कौतूहल
जमाव
दो छोटी कविताएँ
पहली बारिश
प्रतीक्षा
प्रवाह
व्यर्थ विषय

 

प्रतीक्षा

धरती की आँखों की 'प्रतीक्षा'
सखी-सी लगती थी मुझे,
आज शाम
बारिश की बूँदों ने
निबाह डाले
अपने सारे वचन।
हवाएँ लेकर आई हैं मेरे पास
मेरी सखी के
बदन की सुवासित महक।
बरसात की चादर से लिपटी मेरी सखी
झाँकती है शर्माती दुलहन-सी
कहीं कहीं,
जानती हूँ
कि
आज सारी रात सोएगी वो
एक ठंडक तले,
और
मेरे नेत्रों की तृष्णा
हर रात
सूखे आसमान पर
ढूँढ़ेगी 'उसे'
क्या?
रखा होगा आसमान ने?
कहीं छिपाकर?
मेरे हिस्से का बादल
और उसकी बरसात!

९ अगस्त २००३

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter