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अनुभूति में अभिज्ञात की रचनाएँ-

नए गीतों में-
कुशलता है
भटक गया तो
वह हथेली
क्षण का विछोह
क्षतिपूर्तियाँ

अंजुमन में -
आइना होता
तराशा उसने
दरमियाँ
रुक जाओ
वो रात
सँवारा होता
सिलसिला रखिए
पा नहीं सकते

कविताओं में -
अदृश्य दुभाषिया

आवारा हवाओं के खिलाफ़ चुपचाप
शब्द पहाड़ नहीं तोड़ते
तुमसे
हवाले गणितज्ञों के
होने सा होना

गीतों में -
अब नहीं हो
असमय आए
इक तेरी चाहत में
उमर में डूब जाओ
एकांतवास

तपन न होती
तुम चाहो
प्रीत भरी हो
मन अजंता
मीरा हो पाती
मुझको पुकार
रिमझिम जैसी
लाज ना रहे

संकलन में -
प्रेमगीत-
आख़िरी हिलोर तक
गुच्छे भर अमलतास-
धूप

 

सिलसिला रखिए

बारहा तोहमतें गिला रखिए
आप हमसे ये सिलसिला रखिए

लूटने वाला हँसी है इतना
जाँ से जाने का हौसला रखिए

दिल की खिड़की अगर खुली हो तो
दिल के चारों तरफ़ किला रखिए

हमको देना है बहुत कुछ लेकिन
क्या बताएँ कि आप क्या रखिए

और क्या आजमाइशें होंगी
पास आकर भी फ़ासला रखिए

फिर भी तनहाइयाँ सताएँगी
आप चाहे तो काफ़िला रखिए

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