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अनुभूति में अभिज्ञात की रचनाएँ-

नए गीतों में-
कुशलता है
भटक गया तो
वह हथेली
क्षण का विछोह
क्षतिपूर्तियाँ

अंजुमन में -
आइना होता
तराशा उसने
दरमियाँ
रुक जाओ
वो रात
सँवारा होता
सिलसिला रखिए
पा नहीं सकते

कविताओं में -
अदृश्य दुभाषिया

आवारा हवाओं के खिलाफ़ चुपचाप
शब्द पहाड़ नहीं तोड़ते
तुमसे
हवाले गणितज्ञों के
होने सा होना

गीतों में -
अब नहीं हो
असमय आए
इक तेरी चाहत में
उमर में डूब जाओ
एकांतवास

तपन न होती
तुम चाहो
प्रीत भरी हो
मन अजंता
मीरा हो पाती
मुझको पुकार
रिमझिम जैसी
लाज ना रहे

संकलन में -
प्रेमगीत-
आख़िरी हिलोर तक
गुच्छे भर अमलतास-
धूप

 

हवाले गणितज्ञों के

तब भी जोड़ो-घटाओ
अगर गणित कमज़ोर हो
ख़रीद लो सबसे पहले
कलकुलेटर

यह दुनिया
गणितहीन लोगों के लिए नहीं है

गणित का निषेध
आदमी के पक्ष में हैं
और इस पक्ष में सचमुच होना
आदमी का
सबसे संगीन मुहावरा है

लो, गणित के पक्ष में
गढ़े जा रहे हैं
मुहावरे

यह पृथ्वी की विशाल लेखन वही
गणितज्ञों के हवाले हैं।

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