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अभिज्ञात

जन्म - १९६२ गाँव कम्हरियां, जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत।

शिक्षा - हिन्दी में एम. ए., केदारनाथ सिंह पर शोध जारी।

कविता संग्रह - एक अदहन हमारे अन्दर, भग्न नींड़ के आर पार, आवारा हवाओं के खिलाफ़ चुपचाप, वह हथेली, सरापत हूँ, वह दी हुई नींद।
उपन्यास - अनचाहे दरवाज़े पर , जिसे खोजा (शीघ्र प्रकाश्य)।
एकांकी - बुझ्झन।

कार्यक्षेत्र - पत्रकार - कवि - लेखक
आकाशवाणी, दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण। अंग्रेज़ी, बांग्ला, मराठी, तेलुगू, ओड़िया, गुजराती और उर्दू में अनूदित। कला और अभिनय का शौक, कुछ धारावाहिकों में अभिनय।

सम्प्रति - जनसत्ता, अमर उजाला, वेबदुनिया आदि दैनिकों में काम करने के बाद फिलहाल  कोलकाता में

 

अनुभूति में अभिज्ञात की रचनाएँ-

नए गीतों में-
कुशलता है
भटक गया तो
वह हथेली
क्षण का विछोह
क्षतिपूर्तियाँ

अंजुमन में -
आइना होता
तराशा उसने
दरमियाँ
रुक जाओ
वो रात
सँवारा होता
सिलसिला रखिए
पा नहीं सकते

कविताओं में -
अदृश्य दुभाषिया

आवारा हवाओं के खिलाफ़ चुपचाप
शब्द पहाड़ नहीं तोड़ते
तुमसे
हवाले गणितज्ञों के
होने सा होना

गीतों में -
अब नहीं हो
असमय आए
इक तेरी चाहत में
उमर में डूब जाओ
एकांतवास

तपन न होती
तुम चाहो
प्रीत भरी हो
मन अजंता
मीरा हो पाती
मुझको पुकार
रिमझिम जैसी
लाज ना रहे

संकलन में -
प्रेमगीत-
आख़िरी हिलोर तक
गुच्छे भर अमलतास-
धूप

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