अनुभूति में अभिज्ञात की रचनाएँ-
नए गीतों में- कुशलता है भटक गया तो वह हथेली क्षण का विछोह क्षतिपूर्तियाँ
अंजुमन में - आइना होता तराशा उसने दरमियाँ रुक जाओ वो रात सँवारा होता सिलसिला रखिए पा नहीं सकते
कविताओं में - अदृश्य दुभाषिया आवारा हवाओं के खिलाफ़ चुपचाप शब्द पहाड़ नहीं तोड़ते तुमसे हवाले गणितज्ञों के होने सा होना
गीतों में - अब नहीं हो असमय आए इक तेरी चाहत में उमर में डूब जाओ एकांतवास तपन न होती तुम चाहो प्रीत भरी हो मन अजंता मीरा हो पाती मुझको पुकार रिमझिम जैसी लाज ना रहे संकलन में - प्रेमगीत-आख़िरी हिलोर तक गुच्छे भर अमलतास-धूप
दरमियाँ
अभी तो दरमियाँ फ़ासलो के जंगल है अभी आगाज़ से पहले भी कई मुश्किल है
अपनी हर हाल में मर जाने की तमन्ना है मिले ये चैन कि अपना-सा कोई क़ातिल है
एक हम हैं कि कभी वास्ता नही रखते कि अपने सामने मायूस अपनी मंज़िल है
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