अनुभूति में रजनी
भार्गव
की रचनाएँ —

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सर्दी की धूप
छंदमुक्त में-
अनसुनी
आवाज़
गरमी की एक दोपहर
घर
धूप
प्रतीक्षा
बसंत
मेरी कहानी
मौन प्रतीक
लहरों का गाँव
सीमित दायरे
संकलन में-
जग का मेली-
जुगनू
नया साल-
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर
वर्षा मंगल-
बचपन का सावन
वसंती हवा-
बासंती सपने
होली है-
होली कुछ चित्र
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सीमित दायरे
पेड़ के सहारे,
तटस्थ बैठे हुए
पूरी तन्मयता में लीन
एक आदमी,
सुबह से धूप को बटोर रहा था,
कुछ आँखों में सीमित दायरों के
भँवर को समेट रहा था,
ज़िंदगी के सपनों को
लकड़ी का सहारा दे रहा था।
यथार्थ से लड़ते-झगड़ते
दो पल के लिए सन्नाटे से
बात कर रहा था।
सपने कुछ रूखे, कुछ सूखे,
कल फिर आएँगे,
कल शायद तब वो बोझा उठा रहा होगा।
२४ सितंबर २००७
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