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तुम दीपक |
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तुम दीपक में स्नेह हो, तुम बाती में जागर
तुम सागर में बूँद हो तुम्हीं बूँद में सागर
यह दीपक जलता रहे जीवन हो उजियार
अंधड़ छू न सके कभी रक्षक हो करतार
तुम आले की जोत हो
ज्योतित तुमसे आगर
तुम दीपक में स्नेह हो
तुम बाती में जागर
सागर-सागर पार हों आकाशों के द्वार
कंदीलों-सी रौशनी बिखरे अपरंपार
तुम अंबर के दीप हो
तुम धरती के नागर
तुम दीपक में स्नेह हो
तुम बाती में जागर
नवल प्रभा से बढ़ चलो हो नूतन विस्तार
अपना आपा साथ हो जुट जाए संसार
फूल झरें अमरित गिरे
सुख समरिध हो गागर
तुम दीपक में स्नेह हो
तुम बाती में जागर
- पूर्णिमा वर्मन |
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इस माह
दीपावली
विशेषांक में
गीतों में-
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