पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति तुक-कोश

१. १२. २०२२  

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कुण्डलिया हाइकु अभिव्यक्ति हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर नवगीत की पाठशाला रचनाकारों से

केवल राह तुम्हारी

 

 

व्याकुल आँखों ने
देखी है केवल राह तुम्हारी

दूर क्षितिज पर संध्या-सूरज 
मिलन - योग को जोड़ें 
सत्य कल्पना में घुलते हैं
सपने थोड़े - थोड़े 
रातों के सपनों
की करवट में है आह तुम्हारी

सागर को नदियों से मिलने-
की आकुलता  जैसे
वर्षा की बूँदों को धरती - 
की व्याकुलता जैसे 
व्यथित थके मन
ने चाही है कबसे छाँव तुम्हारी

पीड़ा का तम मिट पाए 
आशा का दीप जलाए
जीवन के झंझावातों में 
गीत तेरे बस गाए
निकल पड़ा हूँ
तूफानों में लेकर नाव तुम्हारी
1
- केतन यादव

इस माह

गीतों में-

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केतन यादव

अंजुमन में-

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श्रीधर आचार्य शील

छंदमुक्त में-

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दर्पण चंडालिया

दिशांतर में-

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ब्रिटेन से आशीष मिश्रा

छोटे छंदों में-

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शशिकांत गीते के हाइकु

पुनर्पाठ में-

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भोलानाथ

विगत माह

गीतों में-

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आभा खरे

अंजुमन में-

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उमा प्रसाद लोधी

छंदमुक्त में-

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ब्रजनाथ श्रीवास्तव

दिशांतर में-

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पोलैंड से प्रो. हरजेन्द्र चौधरी

छोटे छंदों में-

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परमजीत कौर रीत के माहिया

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
इस अंक की गजल संपादक हैं : रमा प्रवीर वर्मा