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रंग का बाजार
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सजने लगा है रंग का बाजार भी
पिचकारियों की आज है भरमार भी

रंगोलियाँ बनने लगीं दर आँगने
होने लगे हैं प्रीत में मनुहार भी

उपवन सभी लादे हुए हैं बोर अब
भँवरे कई करने लगे गुंजार भी

चलने लगे होली-मिलन के दौर अब
हर ओर है उल्लास पारावार भी
 
होली नहीं है बाल-गोपालों बिना
बच्चों सहित आए सभी परिवार भी
 
अपनी पसंदी रंग अरु पिचकारियाँ
झूमें लिये बच्चे करें किलकार भी
 
ले के चले गेहूँ-चने की बालियाँ
नमकीन के सँग में मिठाई चार भी
 
होली जलेगी और होगी जीत फिर
सौहार्द के सँग सत्य की इस बार भी
 
आओ मनाएँ रँग लगा दें इक मिसाल
त्योहार आते संग लाते प्यार भी
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- आकुल
१ मार्च २०२६

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