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इल्लाजिकल प्ले
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क्या है उस पार
जब इरादा
जाने किस बात की
दिल दुखाती थी
बदल कर रुख़

अंजुमन में-
इतने टुकड़ों में
लो चुप्पी ली साध

संकलन में-
होली है- रंग न छूटे प्रेम का
      - बात छोटी सी है

 

इल्लाजिकल प्ले

मशीनें लाजिकल होती हैं
किसी फल का टूटकर जमीन पे गिरना
लाजिकल होता है

लाजिकल होते हैं रात और दिन
सर्दी गर्मी सब लाजिकल हैं

हाँ लेकिन सपने लाजिकल नहीं होते
न खुली आँख के
और न ही बंद आँखों के

१ दिसंबर २०१८

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