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अनुभूति में निर्मला जोशी की
रचनाएं-

नए गीतों में-
तुम क्या जानो हम क्या जानें
नई करवट
बेटियाँ
रश्मि-पत्रों पर
रोशनी की याचना

गीतों में-
आ गया है मन बदलना
आलोचना को जी रही हँ
गाँव वृंदावन करूँगी
गीतों के हार
चलते चलते शाम हो गई

दर्पन है सरिता
पर्वत नदियाँ हरियाली
पानी लिख रही हूँ
बुन लिया उजियार मैने
मन अभी वैराग्य लेने
शरद प्रात का गीत
सूर्य सा मत छोड़ जाना

संकलन में—
ज्योति सत्ता का गीत   

  चलते चलते शाम हो गई

चलते-चलते शाम हो गई, रात तुम्हारे नाम हो गई।

ओ रे पंछी नील गगन के
गीतों में कर रैन बसेरा।
डैने हलके हो जाने से
होगा तेरे नाम सवेरा।
चर्चा होगी चौराहों पर, बात ख़ास थी, आम हो गई।

रात-रात भर रंग बिखेरे
बहुत सवेरे चलना होगा।
आज झरे है पंख गुलाबी
कल सुधियों में पलना होगा।
नज़र मिली तो हम-तुम सबकी पीड़ाएं नीलाम हो गई।

कल को भारी सांसें होगी
घुटी-घुटी सी आहें होंगी।
सूनेपन को देख-देखकर
बदली-बदली राहें होंगी।
गीत-प्रीत की इस डगरी पर मीरा भी घनश्याम हो गई।

एक हो गए आंसू-आंसू
एक हो चली सबकी धड़कन।
एक लहर सी चढ़ी जवानी
एक महक का लौटा बचपन।
एक फूल पर स्र्का समय तो एक गंध अविराम हो गई।

 
१६ दिसंबर २००४

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