अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

डॉ. मधु प्रधान

शिक्षा-
एम०ए० (हिन्दी) बी०एड०, एम०बी०ई०एच० त्रिवर्षीय चिकित्सा डिप्लोमा

कार्यक्षेत्र-
गीत, छंदमुक्त, गजल और मुक्तक दोहे आदि छंदों में निरंतर रचनाशील। इसके अतिरिक्त बाल साहित्य में विशेष रुचि।

प्रकाशित कृतियाँ-
अनेक गीतों, गजलों, बालगीतों तथा बालकथा संग्रहों में रचनाएँ संकलित। आकाशवाणी व दूरदर्शन द्वारा निरंतर प्रसारित।

सम्मान पुरस्कार-
साहित्य समर्था पुरस्कार – अखिल भारती कुमुद टिक्कू प्रतियोगिता २०२२ में कहानी “पिता की गंध” के लिए। माँ धनपती देवी स्मृति कथा साहित्य सम्मान – २०२३ में कहानी “कोचिंग रूम” के लिए। सम्मान :नवगीत गौरव सम्मान – वैसबारा शोध संस्थान, २०१८ एवं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला सम्मान – सर्व भाषा ट्रस्ट, २०१९ (कब तक सूरजमुखी बनें हम, नवगीत संग्रह) सहित अनेक साहित्यिक-सांस्कृतिक पुरस्कारों से सम्मानित।

ईमेल- madhu.pradhan.kanpur@gmail.com

  अनुभूति में डॉ. मधु प्रधान की रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
अरी चेतना
उसका खत आया
खिल गयी है सुबह
चुप रहना
समय मछेरा

दोहों में-
अन्तर में मीरा बसी

गीतों में-
आओ बैठें नदी किनारे
इतनी पीड़ा
गीत गाने के लिये भी
चंदन हम तो बन जाएँगे
तुम क्या जानो
पीपल की छाँह में
प्रीत की पाँखुरी
प्यासी हिरनी
मेरी है यह भूल अगर
रूठकर मत दूर जाना
लौटा दो मेरे गाँव गली
सुमन जो मन में बसाए
सुलग रही फूलों की घाटी

अंजुमन में-
चुपके चुपके
जिंदगी मीठी गजल है
जुगनुओं की तरह
जहाँ तक नज़र
जेठ की दोपहर
नया शहर है
बैठे हैं हम आज अकेले
लबों पर मुस्कान

वो लम्हा

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