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अनुभूति में महेश अनघ की रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
अहा बुद्धिमानों की बस्ती
इति नहीं होती
कुछ न मिला
कौन है
गुस्सा कर भौजी
जब जब मेरी विश्वविजय
तप कर के हम
थोड़ी अनबन और उदासी
मुहरबंद हैं गीत
मैराथन में है भविष्य
शब्द शर वाले धनुर्धर
शब्दों में सतयुग की खुशबू
स्वर्णमृग लेने गए थे

गीतों में-
चैक पर लिख दूँ रकम
पत्थर दिल दुनिया
बटवारा कर दो ठाकुर
मची हुई सब ओर खननखन
मूर्तिवाला

हम भी भूखे

संकलन में-
वर्षा मंगल- मेह क्या बरसा

 

 

 

मची हुई सब ओर खननखन

मची हुई सब ओर खननखन
यूरो के घर-डॉलर के घर
करे मदन रितु चौका-बर्तन

किस्से पेंग चढ़े झूलों के
यहाँ बिकाने वहाँ बिकाने
बौर झरी बूढ़ी अमराई
क्या-क्या रख लेती सिरहाने
सबका बदन मशीनों पर है
मंडी में हाज़िर सबका मन

मान मिला हीरा-पन्ना को
माटी में मिल गया पसीना
बड़े पेट को भोग लगा कर
छुटकू ने फिर कचरा बीना
अख़बारों में ख़बर छपी है
सबको मिसरी सबको माखन

सोलह से सीधे सठियाने
पर राँझे की उमर न पाई
फूटे भांडे माँग रहे हैं
और कमाई और कमाई
जहाँ रकम ग्यारह अंकों में
वहाँ प्रेत-सा ठहरा जीवन

दो बच्चे तकदीर मगन है
एक खिलाड़ी एक खिलौना
दो यौवन व्यापार मगन है
एक शाह जी एक बिछौना
मुद्रा का बाज़ार गरम है
इसमें कहाँ तलाशें धड़कन

९ नवंबर २००९

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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