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अपने हर दर्द को
कहाँ बनना सँवरना
किसी उजड़े हुए घर को

जब कभी मुझको
जैसे होती थी किसी दौर में

अंजुमन में-
अच्छी है यही खुद्दारी
अफ़साना ए उल्फ़त
कितना है दम चिराग में
किसने जाना
घटा से घिर गई बदली
गम बढ़ा दीजिए
मुश्किलें आई अगर

  मुश्किलें आईं अगर

मुश्किलें आई अगर तो, फ़ैसला हो जाएगा
कौन है पानी में कितने, सब पता हो जाएगा

दूरियाँ दिल की कभी जो, बढ़ भी जाएँ तो हुज़ूर
तुम बढ़ाना इक कदम, तय फासला हो जाएगा

लाए थे दुनियाँ में क्या तुम, लेके तुम क्या जाओगे
रिश्ते नाते ज़र ज़मीं सब कुछ जुदा हो जाएगा

गर दुआ माँगोगे दिल से, और उस पे हो यक़ी
जब बुरा होना भी होगा, तो भला हो जाएगा

आरज़ू थी फूल इक, दामन में मेरे जाए खिल
सोचती हूँ न हुआ तो, क्या ख़ला हो जाएगा

ज़िंदगी का रास्ता होगा, बड़ा काँटों भरा
साथ तुम होगे तो 'श्रद्धा' हौसला हो जाएगा

१ जून २००९

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