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अनुभूति में डॉ. धर्मवीर भारती की रचनाएँ-

आँगन
उत्तर नहीं हूँ
उदास तुम
उपलब्धि
एक वाक्य
क्या इनका कोई अर्थ नहीं
टूटा पहिया
तुम्हारे चरण
थके हुए कलाकार से
नवंबर की दोपहर
बरसों बाद उसी सूने आँगन में
प्रार्थना की कड़ी
फागुन की शाम
बोआई का गीत
विदा देती एक दुबली बाँह
शाम दो मनःस्थितिया
सुभाष की मृत्यु पर
सृजन

गौरव ग्रंथ में-
अंधायुग

एक वाक्य

चेक बुक हो पीली या लाल,
दाम सिक्के हों या शोहरत -
कह दो उनसे
जो ख़रीदने आए हों तुम्हें
हर भूखा आदमी बिकाऊ नहीं होता है!

१४ जुलाई २००८
 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

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