अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में देवमणि पांडेय
की रचनाएँ -

नई रचनाएँ-
पाँच मुक्तक

अंजुमन में-
इंद्रधनुष में
इस जहाँ में
कौन सुने अब
खूब लुभाती मुंबई
चाहत के हर मुकाम पर
छम छम करती
जग में
दिल के ज़ख़्मों को
दिलवालों की बस्ती
नहीं चलता
ना हँसते हैं ना रोते हैं
हाल अपना


 

  हाल अपना

हाल अपना किसी से मत कहिए
इससे अच्छा है आप चुप रहिए

देख कर लोग फेर लें नज़रें
सबकी नज़रों में ऐसे मत गिरिए

जो भी दिल आपका इजाज़त दे
काम हर वक्त बस वही करिए

सुख की कीमत तभी तो समझेंगे
ये ज़रूरी है कुछ तो दुख सहिए

आज सच को सराहेगी दुनिया
ऐसे धोखे में आप मत रहिए

मिल ही जाएगी एक दिन मंज़िल
शर्त इतनी है राह खुद चुनिए

ज़िन्दग़ी का यही तक़ाज़ा है
वक़्त मुश्किल हो, फिर भी चुप रहिए

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter