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अनुभूति में धर्मेन्द्र कुमार सिंह 'सज्जन' की रचनाएँ-

नयी रचनाओं में-
जिनको आने में

निरक्षरता अगर इस देश की
बरगदों से जियादा घना
रह गया ठूँठ
है मरना डूब के

अंजुमन में-
अच्छे बच्चे
काश यादों को करीने से
गरीबों के लहू से
चंदा तारे बन रजनी में
चिड़िया की जाँ
छाँव से सटकर खड़ी है धूप
जो भी मिट गए तेरी आन पर
दे दी अपनी जान
निजी पाप की
मिल नगर से

छंदमुक्त में-
अम्ल, क्षार और गीत
दर्द क्या है
मेंढक
यादें
हम तुम

 

निरक्षरता अगर इस देश की

निरक्षरता अगर इस देश की काफ़ूर हो जाए
मज़ारों पर चढ़े भगवा, हरा सिंदूर हो जाए

ये मूरत खूबसूरत है न रख इतनी उँचाई पर
कभी नीचे गिरे तो पल में चकनाचूर हो जाए

हसीना साथ हो तेरे तो रख दिल पे जरा काबू
तेरे चेहरे की रंगत से न वो मशहूर हो जाए

लहू हो या पसीना हो बस इतना चाहता हूँ मैं
निकलकर जिस्म से मेरे न ये मगरूर हो जाए

जहाँ मरहम लगाती वो वहीं फिर घाव देती है
कहीं ये दिल्लगी उसकी न इक नासूर हो जाए

२५ फरवरी २०१३

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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