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अनुभूति में सुमन कुमार घई की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
कैसी वसंत ऋतु
खो चुका परिचय
चीत्कार
जीवन क्रम
प्रेम कहानी
प्रेम के दो भाव
मनदीप पुकार
मैं उसे ढूँढता हूँ
वह पेड़ टूट गया

क्षणिकाओं में-
वसंत

संकलनों में-
वसंती हवा- काश मिलो तुम भी
धूप के पाँव- गरमी की अलसाई सुबह
वर्षा मंगल– सावन और विरह
गाँव में अलाव – स्मृतियों के अलाव
गुच्छे भर अमलतास– अप्रैल और बरसात
                  शुभकामनाएँ
नया साल– नव वर्ष की मंगल वेला पर
         –नव वर्ष के गुब्बारे
जग का मेला– गुड्डूराजा

 

 

मैं उसे ढूँढता हूँ

मैं उसे ढूँढता हूँ
१
घड़ी के हर पल में
काल अटल में
नियती के छल में
मैं वह निश्छल ढूँढता हूँ
२
इस जीवन मरन का
इस वय के अयन का
सूत्र है जो वयन का
उसका छोर ढूँढता हूँ
३
सदय की अनुकम्पा
औ' अमिय की उत्कंठा
निहित है हृदय में शंका
कोई पथप्रज्ञ ढूँढता हूँ
४
दूर से है तू दिखता
सान्निध्य में तू छिपता
यह लुका–छिपी का
खेल तुझ से न खेलता हूँ
५
प्रलोभन हर लुभाता
पथ भी भूल जाता
पर भूला न कहलाता
हर सांझ घर लौटता हूँ

घर लौट फिर उसे ढूँढता हूँ
मैं उसे ढूँढता हूँ
मैं उसे ढूँढता हूँ

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