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अनुभूति में श्रीधर आचार्य शील की रचनाएँ-

अंजुमन में-
क्या जमाना आ गया है
झरने लगे हैं
नफरत के जो भाव भरे हैं
मेरे जीवन की बगिया
रात खड़ी है

गीतों में-
इक छोटा सा अंतराल
कुछ दिन बीते
तुमने कर दिया सही
यह कैसा अनुबंध
 

रात खड़ी है

रात खड़ी है बाँह पसारे
ले आँचल में चाँद सितारे

एक भोर के इंतजार में
रीत गये हैं सपने सारे

जागा है अलसाया सूरज
अँधियारे थे उसको घेरे

कहीं ओस की बूँद ढली है
हँसी कहीं पर है भिनसारे

तेज हवा का झोंका आया
पत्ते लगे बदलने डेरे

बूढ़ी माँ शीतल जल लेकर
लगा रही बरगद के फेरे

बजी घंटियाँ मंदिर की जब
जागे मन के भाव घनेरे

१ दिसंबर २०२२

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