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अनुभूति में शैल अग्रवाल की रचनाएँ- 

छंदमुक्त में-
अतीत के खज़ानों से
अभिनंदन
अशांत
आदमी और किताब
उलझन
एक और सच
एक मौका
ऐसे ही
किरक
कोहरा
खुदगर्ज़
जंगल
नारी
देखो ना
नेति नेति
बूँद बूँद
मिटते निशान
ये पेड़
लहरें
सपना अभी भी

हाइकू में
दोस्त, योंही, आज फिर, जीवन, आँसू

संकलन में-
गाँव में अलाव–धुंध में
शुभकामनाएँ–पिचकारी यह
होली – होली हाइकू
गुच्छे भर अमलतास– आई पगली
                – कटघरे में
                - मुस्कान
                - ममता

पिता की तस्वीर– बिछुड़ते समय
ज्योति पर्व– तमसो मा ज्योतिर्गमय
                - दिया और बाती
                - धूमिल रेखा
जग का मेला– चार शिशुगीत
ममतामयी– माँ : दो क्षणिकाएँ

 

आदमी और किताब

आदमी और किताब
एक से ही खिताब
दोनों को ही चाहिए
एक जिल्द एक आवरण
जो बाँध सके
एक प्रशंसक
एक आलोचक
जो इन्हें साध सके
शब्दों में बुना
इच्छाओं का
सुनहरा जाल
कैद में जिसकी
शिकार और शिकारी
साथ–साथ
सम्भालो न तो
बिखर ही जाते हैं
दोनों
पन्ने और खयाल
आदमी हो
या फिर
चाहे
किताब!

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