होली
है
!!

 

होली हाइकु


फागुन मन
इंद्रधनुष तन
होली पे आज

उमड़ा फिर
रंगों का सागर
पलकों नीचे

मलते हम
प्यार का गुलाल
छूटे न कभी

---शैल अग्रवाल

--------------------------------------------------

राग सुरंगी
छलके छल छल
झांझ चंग में

कोयल घोले
कुहुक कुहुक कर
टोना वन में

हरषे होली
अबरक केसर
और रंग में

राधा मोहन
रसमय फागुन
से आँगन में

चलो सखी री
प्रियतम के घर
वृंदावन में

---पूर्णिमा वर्मन

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter