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आँसू

आँसू मेरे जीवन का साथी
या मदमस्त बहार का स्वामी
संताप-वैराग्य, चिंता या हर्ष
प्लावन कर देते नयन-शृंखला का गर्व

मस्तिष्क के पीड़ा का द्योतक
नयन बंधु से विरक्त हुए
जैले रिमझिम सावन के बूँदों से
कल-कल बहते कहाँ चले

जीवन के करुणा का स्वर
मेघ बन जब छाता है
वीरों के नेत्रों पर भी
तुम्हारा ही प्रभुत्व छाता है

कौन धनुर्धर शेष रहा
जो तुम्हें रोक, मुस्कुराया है
दीप्ति, अदीप्ति का भान कहाँ

जो तुम्हें समझ में आया है

आकाश की बूँद गिरकर
जब सीपी से मिल जाती है
मोती बनकर जब निकलती
तो तुम्हारा ही अभास कराती है

करुणा के वेदी पर जो व्यक्ति
निरंतर निमग्न रहेगा
बिन बुलाए नेत्रों पर उसके
तुम्हारा ही दर्पण रहेगा

किंतु भक्ति के सागर में संलग्न
जब किसी भक्त के नेत्रों में आ जाते हो
अपना मान बड़ा देते और
जीवन को सफल बनाते हो

जो तुम्हें बस में कर के
जीवन को जी पाता है

वह स्थितप्रज्ञ होकर
निर्वाण में समा जाता है

२२ सितंबर २००८

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