अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में अरुणा राय की रचनाएँ-

कविताओं में-
अपना खुदा होना
एक खालीपन
क्यों है यह प्यार
गिरी भी तो केवल मैं
तूने वह कविता कहाँ लिखी
मेरे सपनों का राजकुमार
रचना

 

गिरी भी तो केवल मै

चौराहे पर फिसलती हूं
उठती हूँ धड़फड़ाकर गर्द झाड़ती हूँ
कोई देख तो नहीं रहा
फिर घबराहट क्यों
या अभी उठी ही नहीं
या मेरा कुछ छूट गया उस जगह
धैर्य या सहजता या कि क्रम
यह तो बस मुझे पता है
गिरी भी तो केवल मैं ही थी
तो लौट जाना चाहिए
बैठकर बटोर लेना चाहिए
छूटा सब
लोग जान जाएँगे
लोगों को बतलाया जा सकता है पीछे भी
खुद को समझा सकूँगी
कि छूटा सो महत्वपूर्ण नहीं था

१४ जुलाई २००८

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

website metrics