अंजुमन । उपहार ।कवि । काव्य चर्चा । काव्य संगम । किशोर कोना । गौरव ग्राम गौरवग्रंथ । दोहे । रचनाएँ भेजें । नई हवा । पाठकनामा । पुराने अंक । संकलन हाइकु । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । समस्यापूर्ति
अनुभूति में अरुणा राय की रचनाएँ-
कविताओं में- अपना खुदा होना एक खालीपन क्यों है यह प्यार गिरी भी तो केवल मैं तूने वह कविता कहाँ लिखी मेरे सपनों का राजकुमार रचना
अपना खुदा होना गुलामों की जुबान नही होती सपने नही होते इश्क तो दूर जीने की बात नही होती मैं कैसे भूल जाऊँ अपनी गुलामी कि अपना खुदा होना कभी भूलता नहीं तू...
१४ जुलाई २००८
इस कविता पर अपने विचार लिखें दूसरों के विचार पढ़ें
अंजुमन। उपहार। कवि । काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें नई हवा ।पाठकनामा ।पुराने अंक । संकलन ।हाइकु ।हास्य व्यंग्य ।क्षणिकाएँ । दिशांतर ।समस्यापूर्ति
© सर्वाधिकार सुरक्षित अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।