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अनुभूति में महेश केसरी की रचनाएँ

छंदमुक्त में-   
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय
पिता का दुःख
पिता के हाथ की रेखाएँ
पिता पुराने दरख़्त की तरह होते हैं    
पीठ पर बेटियाँ 
सम्बंध

  सम्बंध

मैं थका- हारा सा अपने को महसूस करता 
कहता किसी से नहीं कि मुझे भी प्रेम है एक विधवा से   
वो मेरा इंतजार करती अक्सर खड़े होकर 
सडक के किनारे  

बालकोनी में बैठा ठंढ के दिनों में 
मैं आलसी हुआ करता
चाय को चुस्काता मैं उसके बारे में सोचता  
उसको देखते ही काफूर  हो जाता आलस 
मैं खडा़ होकर बदन तोडता 
उसको  मुस्कुराते हुए जाते देखता  

फिर, उसमें बदलाव आया 
अपनी संतानों का मुँह देखकर खोई-खोई सी दिखती  
समाज के संस्कारों ने उसे तोड़ा मुझसे
पुनः खुद को जोड़ा उससे  

कुछ ऐसा हुआ जैसे प्रकाश का परावर्तन
कुछ प्रोटोन कणों का स्पर्श 
किंतु सब कुछ अज्ञात 
मेरी जब उससे मिलीं थीं नजरें  

हुआ मेरे साथ उसकी बडी़- बडी़ आँखें
बेयर्ड को टेलीविजन के आविष्कार के बाद
जो आनंद आया होगा 
वही आनंद मुझे
उन्हें पहली बार देखने में आया  

उसका मुझसे मिलना 
उसकी फरमाइशें ये पैक करो, वो पैक करो 
फिर, उसका पैसे चुकता करना  
फिर से उसका आना
मुस्कुराते हुए कोई फरमाइश नहीं
किंतु, मेरी धूर्तता ये लेंगी, वो लेंगी और
अच्छी खासी आमदनी करना 

ये आकर्षण इलेक्ट्रॉन-प्रोट्रॉन का 
विपरीत आवेशों का एक भौतिक एवं अस्थायी संसार
मेटर - एन्टीमेटर के तर्कों के साथ
उसका आँखें गोल-गोल घूमाकर बातें करना  

ऐश- ट्रे में झाडते हुए सिगरेट की राख पर 
पोर्ट की कुछ बूँदें डालना 
एक स्वर्गीय आनंद उसका सामीप्य  

१ जूलाई २०२५

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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