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अनुभूति में
महेश केसरी
की रचनाएँ
छंदमुक्त
में-
अधेड़ होती प्रेमिका के
संशय
पिता का दुःख
पिता के हाथ की रेखाएँ
पिता पुराने दरख़्त की तरह होते हैं
पीठ पर बेटियाँ
सम्बंध |
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पिता के हाथ
की रेखाएँ
पिता के हाथ को
एक बार, एक ज्योतिषी ने देखकर बताया था
कि आपकी कुंडली में धनलाभ होगा
संभव है कि आपको राज योग भी मिले
लेकिन, पिता के हाथ कभीलनहीं, लगा कोई गड़ा धन
और ना ही मिला उनको कभी राजयोग
वो, ताउम्र, खदान में पत्थरों को काटते रहे
काटते-काटते ही शायद घिस गई,
पिता के हाथ की रेखाएँ
जिनमें, कहीं घन योग या
राज योग रहा होगा
इसलिए भी शायद उनको नहीं मिला कभी
धन योग ना ही कभी मिल सका उनको राजयोग
वो, ताउम्र बने रहे दिहाड़ी मजदूर और
काटते रहे पत्थरों के विशालकाय खदान को
और, काटते-काटते खदान का पत्थर
एक दिन पिता उसी खदान में समा गये
फिर, पिता कभी घर
लौटकर नहीं आये
ज्योतिषी आज भी चौक पर
बाँच रहा था, भविष्य
१ जूलाई २०२५ |