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अनुभूति में
महेश केसरी
की रचनाएँ
छंदमुक्त
में-
अधेड़ होती प्रेमिका के
संशय
पिता का दुःख
पिता के हाथ की रेखाएँ
पिता पुराने दरख़्त की तरह होते हैं
पीठ पर बेटियाँ
सम्बंध |
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अधेड़ होती
प्रेमिका के संशय
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय
शायद समय से जुड़ जाते हैं
जो, दिनों, सप्ताहों, महीनों, सालों के बीच
खुद को खंगालती है
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय शायद, अपने वजन के साथ
जुड़ जातें हैं, जो, अक्सर अपने कपड़ों की बढ़ती
नाप के बीच खुद को आंकती है
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय शायद,
अपने बालों के बीच की सफेदी के साथ जुड़ जाते हैं
जो अक्सर अपने बालों के बीच खुद
को झूलती पाती है
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय शायद,
अपने चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों के साथ जुड़ जाते हैं
जो खुद को अक्सर उन झुर्रियों के बीच
सिकुड़ती हुई पाती है
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय
शायद, अपनी आंखों की वीरानी के साथ जुड़ जाते हैं
जो, अक्सर खुद को उन स्याह खंडहरो के बीच
भटकती हुई पाती है.
अधेड़ होती प्रेमिका के संशय शायद,
अपने प्रेमी की हँसी के साथ जुड़ जाते हैं
जो, अक्सर अपने प्रेमी की हँसी को संशय के साथ
कसमसाती हुई पाती है
१ जूलाई २०२५ |