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हाइकु में-
सूर्य गरबा

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शब्द-प्रेम

दोहों में-
असली मंजिल दूर है

गीतों में-
आसमान गुमसुम रहता है
इक राजा था, इक रानी थी
एक टिमटिम लौ
एक टुकड़ा धूप
कम्प्यूटर रोबोट
ताँगे वाला घोड़ा
दूर अभी मंजिल है
फूलों की घाटी में
भैंस सुनती बाँसुरी
मन माँगे ठौर
महानगर
मुए केंचुए
रोटी से ऐटम-बम प्यारा
रूप रस गंधों वाले दिन
स्लेट लिखे शब्दों के
समय को नाथ!

संकलन में-
चंपा- चंपा कुछ हाइकु

गंगा- धार समय की
ममतामयी- अम्मा चली गई
         माँ के सपने
रक्षाबंधन- राखी धागा सूत का
वर्षा मंगल- बूँदों ने क्या छुआ देह को
हरसिंगार- पारिजात के फूल
         हाइकु
होली है- मस्ती के फाग

 

सूर्य गरबा

१
सूर्य गरबा
नाचती है धरती
चिर उत्सव
२
चंद्र-अँगूठी
सितारों जड़ी साड़ी
रात रानी- सी
३
फूल मालाएँ
तेजधार छुरियाँ
काटती गला.
४
दूब के आँसू
धूप के रूमाल से
सूरज पोंछे
५
लौटे गोधन
अपने खूँटे पर
साँझ की वेला

१ दिसंबर २०२२

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