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राखी धागा सूत का

रक्षाबंधन

राखी धागा सूत का, पक्का जैसे तार
पावनता निस्सीम है, दुनिया भर का प्यार

घड़ी देख कर ताकती, बहना अपलक द्वार
भैया चाहे व्यस्त हों, आएँगे इस बार.

अम्मा-बापू चल बसे, भैया का परिवार
भौजी ने बदला सभी, मैके का व्यवहार

जात-पात, छोटा-बड़ा, नहीं धरम अरु नेम
सिखा हुमायूँ भी गया, बहन-भ्रात का प्रेम

बहना प्यारी मित्र है, है माँ का प्रतिरूप
गरमी में छाया घनी, सरदी में है धूप

--शशिकांत गीते
६ अगस्त २०१२

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