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नई रचनाओं में-
इक राजा था, इक रानी थी
महानगर
मुए केंचुए
रूप रस गंधों वाले दिन
स्लेट लिखे शब्दों के

दोहों में-
असली मंजिल दूर है

गीतों में-
आसमान गुमसुम रहता है
एक टिमटिम लौ
एक टुकड़ा धूप
कम्प्यूटर रोबोट
ताँगे वाला घोड़ा
दूर अभी मंजिल है
फूलों की घाटी में
भैंस सुनती बाँसुरी
मन माँगे ठौर
रोटी से ऐटम-बम प्यारा
समय को नाथ!

संकलन में-
चंपा- चंपा कुछ हाइकु

गंगा- धार समय की
ममतामयी- अम्मा चली गई
         माँ के सपने
रक्षाबंधन- राखी धागा सूत का
वर्षा मंगल- बूँदों ने क्या छुआ देह को
हरसिंगार- पारिजात के फूल
         हाइकु
होली है- मस्ती के फाग

 

भैंस सुनती बाँसुरी

बुर्ज ऊपर,
बहुत ऊपर
और चढ़ना भी जरूरी

सीढ़ियाँ मलबा,
बगल घाटी पड़ी
रस्सियाँ टूटी हुई
मुश्किल बड़ी
लौह से संकल्प पल- पल
हो रही बट्टी कपूरी

कौन खोजे हल,
छिड़ीं हैं गर्म बहसें
भैंस सुनती
बाँसुरी
रोएँ हँसें
कुछ अपाहिज जन्म से
कर रहे बातें खजूरी

१८ फरवरी २०१३

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