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तेरी हँसी
दोपहर
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शाम
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सुबह
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मेरा यूटोपिया

संकलन में-
वसंती हवा-फूले फूल पलाश

हिंदी की सौ सर्वश्रेष्ठ प्रेम कविताएँ-थके नयन में सुबह

` तेरी हँसी

तुम तो
किसी पहाड़ी झरने सी
हँसती हो

तेरे हँसते ही
बनचम्पा खिल जाती है
शांत झील की सतह अचानक
हिल जाती है
पुरवाई में
शीतलता बनकर
गंसती हो

सुनकर हँसी तुम्हारी
हवा अधिक अलसाती
गदराई सरसों की काया
है अंगड़ाती
आँखों में
मीठे सपने बनकर
धँसती हो

सुनकर हँसी
मुझे भी कुछ-कुछ हो जाता है
बौराया मन स्वप्न-लोक में
खो जाता है
पोर-पोर में
उतर रही तुम
बन चुस्ती हो

1 जून 2007

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