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आकाश नीला
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गीतों में-
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जेहन मे
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दोपहर
प्यार का रंग
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मृदु संगीत कला का
रात
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शाम
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सुबह
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छंद मुक्त में-
मेरा यूटोपिया

संकलन में-
वसंती हवा-फूले फूल पलाश

हिंदी की सौ सर्वश्रेष्ठ प्रेम कविताएँ-थके नयन में सुबह

` आकाश नीला

देखिए, उस पार
थऱ-थऱ काँपता आकाश नीला!

हाँ वही आकाश
जिसमें सुबह का सूरज उगा था
खोलकर पर उड़ानें भरने लगा
हारिल-सुगा था

जानिए
क्यों हो गया है यह समय
बकवास नीला!

क्यों गए हैं वनपखेरू
भूल, खुलकर चहचहाना
है बिसारा डरे बच्चे के
अधर ने मुस्कराना

क्या न है यह मुक्ति के
अहसास का उपहास नीला!

तुम न जाने क्यों
घृणा से देखते हो राजपथ को
और मुट्ठी तानकर दुहरा रहे
पिछली शपथ को

हो गया तब्दील पतझर में
अगर मधुमास नीला!

४ जनवरी २०१०

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